spot_img

नवजोत सिद्धू को नहीं मिली राहत, गिरफ्तारी तय

HomeNATIONALनवजोत सिद्धू को नहीं मिली राहत, गिरफ्तारी तय

दिल्ली। 1988 के रोड रेज केस में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिह सिद्धू (NAVJOT SINGH SIDHU) को एक साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। ताजा खबर यह है कि सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सरेंडर करने के लिए कुछ हफ्तों की मोहलत मांगी थी, हालांकि राहत नहीं मिली।

सिद्धू के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कुछ ‘चिकित्सीय स्थितियों’ का हवाला देते हुए अपने मुवक्किल को आत्मसमर्पण करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी को एक उचित आवेदन पेश करने और CJI बेंच के समक्ष इसका उल्लेख करने के लिए कहा था, लेकिन CJI ने इसका मौका नहीं दिया। इसका मतलब यह है कि सिद्धू को आज सरेंडर करना होगा, नहीं होत उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भैयाजी यह भी देखे: CBI ने लालू यादव और मीसा भारती के खिलाफ भ्रष्टाचार का नया मामला किया दर्ज, पर चल रही छापेमारी

जानिए क्या है सिद्धू का पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के रोड रेज मामले में सिद्धू (NAVJOT SINGH SIDHU) को एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सिद्धू को पहले दी गई 1000 रुपये जुर्माने की सजा बढ़ा कर एक वर्ष का सश्रम कारावास करते हुए अपने फैसले में कहा है कि अनुचित सहानुभूति दिखाते हुए अपर्याप्त सजा देने से न्याय प्रणाली को अधिक नुकसान होगा और इससे जनता में कानून की प्रभावशीलता के प्रति विश्वास घटता है।

27 दिसंबर 1988 का है मामला 

रोड रेज का यह मामला 27 दिसंबर 1988 का है। जिसमे नवजोत सिह सिद्धू पटियाला में कार से जाते वक्त गुरनाम सिह नाम के बुजुर्ग से भिड़ गए थे। गुस्से में सिद्धू ने उन्हें मुक्का मार दिया जिस कारण गुरुनाम सिह की मौत हो गई। सिद्धू पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ।

निचली अदालत ने सिद्धू (NAVJOT SINGH SIDHU) को सुबूतों के अभाव में 1999 में बरी कर दिया। लेकिन हाई कोर्ट ने 2006 में सिद्धू को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। सिद्धू ने सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की और सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सिद्धू को गैर इरादतन हत्या के जुर्म से बरी कर दिया लेकिन आइपीसी की धारा 323 में चोट पहुंचाने का दोषी मानते हुए 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त सिद्धू को कारावास की सजा नहीं दी थी। इस फैसले के खिलाफ पीड़ित परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सजा बढ़ाने की मांग की थी जिस पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।