छत्तीसगढ़ का ऐसा गाँव जहाँ आज भी वैदराज मिनटों में जोड़ देते है टूटी हडियां…

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रायपुर। 21वीं सदी में जहां वैज्ञानिक और डॉक्टर हर रोज नए शोध में पारंगत होकर आगे बढ़ रहे है। चिकित्सा की नई नई तकनीक और तौर तरीके इज़ात किए जा रहे है। वही इन सब के उलट सूबे के एक गाँव में आज भी वैदराज आयुर्वेद की प्राचीन पद्धति से लोगो का दर्द दूर कर रहे है।

जी बिलकुल सही सुना और पढ़ा आपने ! छत्तीसगढ़ के एक गांव में हजारों साल पुरानी आयुर्वेद पद्धति से इलाज ज़ारी है। यहाँ इलाज़ कराने न सिर्फ सूबे के गांव कस्बों से लोग आते है बल्कि शहरों और दीगर राज्यों से भी लोग उम्मीद लेकर यहाँ पहुंचते है। दर्द से करहाते लोगो को जब इनका इलाज़ मिलता है तब इन्हे भी राहत मिलती है।

ये पूरी कहानी है छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के बिचारपुर गाँव की। इस गांव को वैद्यों का गाँव भी अगर कहा जाए तो सही होगा। दरअसल इस गाँव में हर दुसरे घर में एक वैद्यराज मिलते है जो प्राचीन परम्पराओं और जड़ीबूटियों के सहारे लोगो  इलाज़ कर रहे है। बताते है कि इस गाँव के किसी भी वैद्य के पास  शरीर के किसी भी हड्डी को जोड़ने, या इसके दर्द को खत्म करने सटीक पैतरा है। केवल जड़ीबूटियों के लेप और बांस की कमचिल से टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने का माद्दा ये रखते है। इतना ही नहीं बल्कि इनके इलाज के बाद किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट अब तक किसी को नहीं हुआ है।

जड़ी बूटियों का है खज़ाना

बिचारपुर के ही रहने वाले एक जानकार ने बताया नज़दीक में ही श्रीसिद्ध बाबा का मंदिर है। जिसके पास द्रौपती पहाड़ी में दुनिया की कई नायाब जड़ी-बूटीयों का खज़ाना है। उन्होंने ये भी बताया कि इस पहाड़ी पर स्थित श्रीसिद्ध बाबा मंदिर में एक परिवार के द्वारा पीढ़ियों से लोगों का आयुर्वेदिक पद्धति से निशुल्क इलाज किया जाता रहा है। अब उनके वंशजों ने इस काम का बीड़ा उठाए रखा है।

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200 से 1000 रुपए तक ख़र्च
इन वैद्य राज के इलाज़ की कीमत बाकी अंग्रेजी इलाज से बेहद सस्ती है। हड्डियां जोड़ने और दर्द के लिए इनके द्वारा अलग अलग तरह के जड़ी बूटी का इस्तेमाल किया जाता है। जिनमें कुछ खरीदकर और कुछ जंगलों से खुद जाकर लाना होता है। इन्ही जड़ीबूटियों की क़ीमत वो अपनी फ़ीस के रूप में ईलाज कराने पहुंच रहे लोगो से लेते है, जिसकी अधिकतम लागत 1000 रुपए तक है।