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हालात सरकार के काबू में अब नहीं और राहत के तमाम दावे कोरी सियासत ही रह गए : साय

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण की जाँच और उपचार में मची लूट के साथ ही अब ‘रेमडेसिवीर’ (इंजेक्शन) की कालाबाज़ारी पर अंकुश पाने में राज्य सरकार की लापरवाही पर तीखा हमला बोला है। साय ने कहा कि प्रदेश सरकार न तो कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ़्तार को रोक पा रही है और न ही कोरोना के नाम पर लूट और कालाबाज़ारी पर काबू कर पा रही है। साय ने कहा कि प्रदेश सरकार के असंवेदनशीलता के चलते प्रदेश के कोरोना संक्रमितों को चौतरफा आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है और प्रदेश सरकार रोज़ झूठे दावे करके ज़मीनी सच्चाई से मुँह चुरा रही है।

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने कहा कि जबसे प्रदेश में निजी अस्पतालों को कोरोना संक्रमितों के इलाज की अनुमति दी गई है, कोरोना मरीज जाँच और उपचार के नाम पर क़दम-क़दम पर लूटे जा रहे हैं और अब तो हद हो गई है कि कोरोना संक्रमितों के सामने ‘रेमडेसिवीर’ (इंजेक्शन) का संकट खड़ा हो गया है। साय ने कहा कि प्रदेश सरकार की विफलता के चलते अब लोगों की जान से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। जीवनरक्षक माने जा रहे इस इंजेक्शन की कीमतें आसमान छू रही हैं और इंजेक्शन की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका कृत्रिम अभाव पैदा कर इस इंजेक्शन की खुलेआम कालाबाज़ारी हो रही है और लोगों को 24सौ रुपए का यह इंजेक्शन 07 से 08 हज़ार रुपए में ख़रीदना पड़ रहा है। साय ने कहा कि कोरोना से मौतों के बढ़ते आँकड़ों से भयभीत एवं चिंतित लोग अपना सबकुछ दाँव पर लगाने को विवश हैं। लोगों की जान से हो रहे इस खिलवाड़ को रोक पाने में विफल साबित हो रही प्रदेश सरकार के लिए ये हालात शर्म से चुल्लूभर पानी में डूब मरने के लिए काफी हैं।

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले में प्रदेश सरकार अब शर्मनाक विफलता का सामना कर रही है। एक तरफ प्रदेश सरकार लोगों को राहत पहुँचाने के खोखले दावे कर रही है, दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों को इलाज की राशि अग्रिम तौर पर जमा करने बाध्य किया जा रहा है। एडवांस राशि जमा नहीं कराने पर कोरोना संक्रमितों को बिना इलाज किए लौटाया जा रहा है। बिलासपुर के दो निजी अस्पतालों में इस तरह की शिकायतें सामने आने के मद्देनज़र साय ने कहा कि प्रदेशभर में कोरोना संक्रमितों के इलाज की अमूमन यही दशा है। प्रदेश में कोरोना की जाँच को लेकर अब तक कोई एक निश्चित दर तय कर पाने में भी सरकार विफल रही है और इसका नतीजा यह हो रहा है कि निजी लैब और अस्पताल कोरोना की जाँच के नाम पर भी खुलेआम लूट मचाए बैठे हैं। साय ने कहा कि आईएमए और स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक में कोरोना टेस्ट 24सौ रुपए में करने पर जो सहमति बनी थी, प्रदेश सरकार उसका भी पालन नहीं कराके लूट के इस खेल को बेखटके चलने दे रही है। कोरोना टेस्ट की जो दर राजस्थान में 12सौ रुपए तय हुई है, उससे दुगुनी दर छत्तीसगढ़ में तय करने का आधार क्या था?

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री साय ने कहा कि हालात प्रदेश सरकार के काबू में अब नहीं रह गए हैं और अब राहत देने के उसके तमाम दावे कोरी सियासत ही साबित हो रही हैं। रायपुर संभाग के कमिश्नर को कोरोना की जाँच और इलाज के नाम पर मची लूट नज़र आ रही है और वे अपने स्तर पर कलेक्टर्स को तलब कर इसकी जानकारी ले रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार को इन मामलों की सुध लेने की ज़रूरत तक महसूस नहीं हो रही है! साय ने कहा कि रोज़ कोरोना संक्रमितों और उससे हो रही मौतों के बढ़ते आँकड़े बता रहे हैं कि प्रदेश सरकार इस महामारी के सामने घुटने टेक चुकी है और लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। प्रदेश में कोरोना रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहा है और प्रदेश का हर व्यक्ति इन दिनों भय और चिंता के साए में जीने को मज़बूर नज़र आ रहा है।  साय ने कहा कि प्रदेश में कोरोना मामलों की संख्या 70,777 और इससे होने वाली मौतों का आँकड़ा 588 पार होना इस आशंका और चिंता को और बढ़ा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रदेश कितने भयावह दौर का सामना करने विवश होगा!