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शोध : सम्राट विक्रमादित्य ने की थी डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी देवी की स्थापना

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक देवी मंदिरों में से एक माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। इसके पीछे तथ्य और कुछ प्रमाण शोध के दौरान प्रस्तुत किए गए है।

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दरअसल विक्रमादित्य युगीन वृहत्तर भारत विचार समागम का आयोजन “महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ” उज्जैन में किया गया था। ये आयोजन इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली एवं मालवा प्रान्त ईकाई, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन और मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल के सहयोग से आयोजित किया गया था।

इसमें प्रथम दिवस उदघाटन सत्र में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ बालमुकुंद पाण्डेय, एमपी के संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ल समेत कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, प्रोफेसर शामिल हुए। इसके आलावा 16 राज्यों से आये हुए इतिहासकार, साहित्यकार, पुरातत्वविद, शोधार्थी भी शामिल हुए।

इस विचार समागम के पहले सत्र में सम्राट विक्रमादित्य के विषय में पंचांग, सिक्के, इतिहास, साहित्य, खुदाई, पुरातत्व, कथा, दंत कथाओं समेत विभिन्न गाथाओं में सम्राट विक्रमादित्य के प्रत्यक्ष विद्यमान होने के अनगिनत प्रमाण मिले है। इन पर विस्तार पूर्व चर्चा हुई।

वहीं दूसरे दिन देश के विभिन्न राज्यों से आये हुए इतिहास कार, साहित्यकार ,पुरातत्वविद , शोधार्थी गणों के अलावा नॉर्वे, कनाडा, मॉरीसस, अमेरिका, स्वीडन, डेनमार्क आदि अंतरराष्ट्रीय स्तर के वक्ताओं ने भी हिस्सा लिया। इसमें पं.रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के प्राचीन भारतीय संस्कृति एवम पुरातत्व विभाग के सहायक प्राध्यापक नितेश कुमार मिश्रा, बस्तर यूनिवर्सिटी से डॉ. आनंद मूर्ति मिश्र, भारतीय इतिहास संकलन समिति सदस्य डॉ. संध्या शर्मा,
ज्योतिष एवम वास्तु सलाहकार पण्डित मनोज शुक्ला महामाया मन्दिर रायपुर तथा ढाल सिंह देवांगन व कु. भाग्यश्री दीवान शोधार्थी प्राचीन भारतीय संस्कृति एवम पुरातत्व ने भी अपने शोध पत्र से सम्बंधित वक्तव्य दिया।

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छत्तीसगढ़ से गये उपरोक्त वक्ताओं के अध्यक्षीय भाषण में नितेश मिश्रा जी ने छत्तीसगढ़ से प्राप्त लौह अयस्क से बने शस्त्रों आदि का सम्राट विक्रमादित्य से सम्बन्ध होने का प्रमाण बताया। डॉ संध्या शर्मा ने छत्तीसगढ़ के लोक परम्परा में महराज विक्रमादित्य व भर्तृहरि के जीवंत प्रमाण को प्रस्तुत किया। पण्डित मनोज शुक्ला ने अपने शोध विषय में पुराणों व इतिहासों में सम्राट विक्रमादित्य, जिसमें संवत प्रचलन के आरम्भ तथा डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी देवी की स्थापना का सम्राट विक्रमादित्य से सम्बंधित ऐतिहासिक प्रमाण को प्रस्तुत किया।