रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना काल में भी वनवासियों को वनोपज (Forest produce) और वनोषधि संग्रहण से रोजगार मिला है। आर्थिक रूप से प्रदेश में आत्मनिर्भरता भी आई है, साथ ही अर्थव्यवस्था भी दुरुस्त रही है। छत्तीसगढ़ सरकार अपनी नई आर्थिक नीति में वनों के जरिये वनवासियों की बड़ी जनसंख्या के जीवन में बदलाव ला रही है।
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राज्य में हर साल तेंदूपत्ता संग्रहण से 12 लाख 65 हजार संग्राहक परिवारों को रोजगार मिल रहा है। राज्य शासन द्वारा तेंदूपत्ता का मूल्य बढ़ाकर अब 4000 रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है, जिससे उन्हें 649 करोड़ रुपए का सीधा लाभ प्राप्त हो रहा है। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले वनोपजों (Forest produce) की संख्या 7 से बढ़ाकर अब 52 कर दी है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ लघु वनोजपजों के संग्रहण में देश में पहले स्थान पर है। यहां इस वर्ष शुरुआती छह माह में ही लघु वनोपजों के संग्रहण का सालाना लक्ष्य पूर्ण कर लिया गया। चालू वनोपज संग्रहण के दौरान राज्य में जुलाई 2020 तक 112 करोड़ रूपए की राशि के 4 लाख 75 हजार क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण किया गया।

राज्य में वनवासियों के हित को ध्यान में रखते हुए महुआ का समर्थन मूल्य 17 से बढ़ाकर 30 रूपए प्रति किलोग्राम किया गया। योजना के दायरे में लाए गए वनोपजों का कुल 930 करोड़ रुपए का व्यापार राज्य में होता है। वनोपजों (Forest produce) की खरीदी 866 हाट बाजारों के माध्यम से की जा रही है।
मिल रहा लाखों लोगों को रोज़गार
प्रदेश में काष्ठ कला विकास, लाख चूड़ी निर्माण, दोना-पत्तल निर्माण, औषधि प्रसंस्करण, शहर प्रसंस्करण, बेल मेटल, टेराकोटा हस्तशिल्प कार्य आदि से 10 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन हो रहा है। वन विकास निगम के जरिये बैंम्बू ट्री गार्ड निर्माण, बांस फर्नीचर निर्माण, वनौषधि बोर्ड के जरिये औषधीय पौधों का रोपण आदि से करीब 14 हजार युवकों को रोजगार दिया जा रहा है।
इसी तरह सीएफटीआरआई मैसूर की सहायता से महुआ आधारित एनर्जी बार, चाकलेट, आचार, सैनेटाइजर, आंवला आधारित डिहाइड्रेटेड प्रोड्क्ट्स, इमली कैंडी, जामुन जूस, बेल शरबत, बेल मुरब्बा, चिरौंजी एवं काजू पैकेट्स आदि के उत्पादन की योजना बनाई जा रही है। इससे 5 हजार से ज्यादा परिवारों को रोजगार मिलेगा।
Forest produce से आय में बढ़ोतरी
छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज संग्रहण से वनवासियों की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जशपुर और सरगुजा जिलों में चाय बागान से हितग्राहियों को सीधे लाभ मिल रहा है। कोविड-19 के संकट काल में 50 लाख मास्क की सिलाई से एक हजार महिलाओं को रोजगार मिला है। चालू वर्ष में लगभग 12 हजार महिलाओं को इमली के प्राथमिक प्रसंस्करण से 3 करोड़ 23 लाख रूपए की अतिरिक्त आमदनी हुई है।
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वनवासियों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में 10 हजार 497 वनवासियों की स्वयं की भूमि पर 18 लाख 56 हजार फलदार और लाभकारी प्रजातियों के पौधे रोपे गए। वर्ष 2020 में वनवासियों की स्वयं की भूमि पर 70 लाख 85 हजार पौधे के रोपण का लक्ष्य है।