spot_img

तिब्बत पर आधिपत्य जमाने के बाद अब भूटान को निगलने की कोशिश कर रहा ड्रेगन, ऐसी है साजिश

HomeINTERNATIONALतिब्बत पर आधिपत्य जमाने के बाद अब भूटान को निगलने की कोशिश...

नई दिल्ली। चीन की नापाक करतूतों से इन दिनों देश की उत्तरी सीमा पर तनाव का माहौल है। लद्दाख और अरुणाचल में चीनी सेना घुसपैठ कर रही है और भारतीय भू-भाग को हथियाने में लगी है। चीन के इन मंसूबों को भारतीय सेना बुरी तरह कुचल भी रही है। साल 1962 में चीेन के साथ युद्ध वीराम के दौरान जाे समझौते हुए थे, चीन अब उन्हे नकार रहा है और अरुणाचल व लद्​दाख में भारतीय भू-भाग पर अपना झूठा दावा भी कर रहा है। इसके साथ ही लगातार चीन भारत को गीदड़ भभकियां भी दिए जा रहा है। चीन की विस्तारवादी हड़प नीति से वैसे तो पूरी दुनिया वाकिफ है, लेकिन अब चीन को लेकर पूरी दुनिया में नकारात्मक माहौल भी बनने लगा है। कभी एक स्वतंत्र देश के रूप में अस्तित्व रखने वाले तिब्बत को चीन ने अपना स्वायत्त क्षेत्र घोषित कर उसपर कब्जा जमा लिया था। करीब 40 वर्षों में चीन ने तिब्बत काे पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया और वहां के धर्मगुरू दलाई लामा को निर्वासित होकर अपने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ना पड़ रहा है। लाखों तिब्बती भाई अपना घर छोड़कर आज भारत सहित कुछ दूसरे मुल्कों में शरण लिए हुए हैं। यही चीन अब अपने दूसरे पड़ोसी देश भूटान की जमीन पर भी कब्जा कर रहा है।

चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) अब भूटान के खिलाफ नया मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चीन ने सीमा को लेकर 25वें दौर की बातचीत को अपने पक्ष में झुकाने के मकसद से भूटान पर दबाव बनाने के लिए पश्चिमी और मध्य भाग में बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात कर दिया है। थिंपू को सर्वोच्च स्तर पर पीएलए के खतरे को लेकर सावधान कर दिया गया है। संभावना है कि आगामी बातचीत में पहले से अतिक्रमित क्षेत्रों और पश्चिमी भाग में दावों की सौदेबाजी के लिए बीजिंग पीएलए के घुसपैठ और अतिक्रमण का इस्तेमाल करेगा। भूटान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में हैं क्योंकि यह देश सिलीगुरी कॉरीडोर के करीब है और भूटान की ओर से जमीन को लेकर किया गया कोई भी समझौता भारतीय रक्षा पर बुरा प्रभाव डालेगा। भारतीय सेना, कूटनीति और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि 2017 में 73 दिनों तक चले डोकलाम स्टैंड ऑफ के दौरान भारत ने भूटान को पीएलए का सामना करने में मदद की, लेकिन चीनी सेना ने दोनों सहयोगी देशों की सेनाओं को परखना बंद नहीं किया है।

चीन भूटान के पश्चिमी सेक्टर में 318 स्क्वायर किलोमीटर और सेंट्रल सेक्टर में 495 स्क्वायर किलोमीटर पर दावा करता है। विस्तारवादी नीति के तहत चीनी सेना रोड और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में जुटी है और आक्रामक पेट्रोलिंग के जरिए भूटान की रॉयल आर्मी को डराने की कोशिश की जाती है। पीएलए ने पश्चिमी भूटान के पांच इलाकों में घुसपैठ की और नई सीमा पर दावा ठोका है जो भूटान में 40 किलोमीटर भीतर चुंबी वैली तक है। इसने बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है, रक्षापंक्ति को बेहतर बनाया है, सैनिकों और रसद को अंतिम छोड़ तक पहुंचाने के लिए सड़कें, हेलीपैड्स का निर्माण किया गया है। थिंपू ने भी रॉयल भूटानी आर्मी को तैयार रहने को कहा है और पीएलए को तोरसा नाले के दक्षिण से आने से रोकने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया है। पीएलए का विस्तारवादी प्लान केवल पश्चिमी भूटान तक सीमित नहीं है। जून में चीन ने भूटान के साकटेंग वन्यजीव अभयारण्य प्रोजेक्ट पर आपत्ति जाहिर की थी। चीन ने कहा था कि यह विवादित सीमा इलाके में मौजूद है। भारत और चीन से लगती सीमा के पास यह 750 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है। नए दावा भारत को भी विवाद में खींच सकता है क्योंकि अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश के निकल है, जिस पर चीन अपना दावा करता है।

तिब्बत पर ऐसे जमाया कब्जा

सन् 1933 ई0 में 13वें दलाई लामा की मृत्यु के बाद से बाह्य तिब्बत भी धीरे-धीरे चीनी घेरे में आने लगा। चीनी भूमि पर लालित पालित 14 वें दलाई लामा ने 1940 ई में शासन भार सँभाला। 1950 ई में जब ये सार्वभौम सत्ता में आए तो पंछेण लामा के चुनाव में दोनों देशों में शक्तिप्रदर्शन की नौबत तक आ गई एवं चीन को आक्रमण करने का बहाना मिल गया। 1951 की संधि के अनुसार यह साम्यवादी चीन के प्रशासन में एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया। इसी समय से भूमिसुधार कानून एवं दलाई लामा के अधिकारों में हस्तक्षेप एवं कटौती होने के कारण असंतोष की आग सुलगने लगी जो क्रमश: 1956 एवं 1959 ई में जोरों से भड़क उठी, लेकिन बलप्रयोग द्वारा चीन ने इसे दबा दिया। अत्याचारों, हत्याओं आदि से किसी प्रकार बचकर दलाई लामा नेपाल पहुंच सके। अभी वे भारत में बैठकर चीन से तिब्बत को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं। अब सर्वतोभावेन चीन के अनुगत पंछेण लामा यहाँ के नाममात्र के प्रशासक हैं।